दुश्मनों की क्या औकात, जो हमें गिरा दें,
हम वो हैं जो सामने वाले की अकड़ निकाल दें,
हम वो खिलाड़ी हैं जो अपनी शर्तों पर खेलते हैं,
मेरी माँ ने किसी की तरक्की पर जलना नहीं सिखाया!
दिल में नफरत रखने वालों की कमी नहीं दुनिया में,
जिगर वाले का डर से कोई वास्ता नहीं होता
जो भी देखे कहे — “ये तो पूरी बवाल है भोले!”
और तुम्हें लगता है मैं तुम्हारी सुनूंगा…!
हमें कम आँका, तो भूल गया कि आग हवा से नहीं — रुतबे click here से उड़ती है ✨
बदमाश तो हम बचपन से है, कई लोगो को ठोक रक्खा है,
क्योंकि हम बदमाशी में भी कला ढूंढते हैं।
हमें कम आँका, तो भूल गया कि आग हवा से नहीं — रुतबे से उड़ती है ✨
क्योंकि जो मैं था वो मैं रहा नहीं, और जो मैं हूँ, वो तुम्हें पता नहीं…!
हम वो लोग हैं जो खामोशी में भी डर पैदा करते हैं,